श्रीनगर, 14 अक्टूबर। जम्मू-कश्मीर में सरकारी सेवा रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी और भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में क्राइम ब्रांच कश्मीर की स्पेशल क्राइम विंग (SCW) ने तीन सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। आरोपियों पर जन्मतिथि से संबंधित दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़ा कर अनुचित लाभ हासिल करने में शामिल होने का आरोप है। यह मामला कृषि विभाग में सेवा रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है।
क्राइम ब्रांच कश्मीर की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, बुधवार को केस एफआईआर नंबर 02/2022 में जांच पूरी करने के बाद चार्जशीट श्रीनगर स्थित विशेष भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय में पेश की गई। यह मामला रणबीर दंड संहिता (RPC) की धारा 420, 468, 471 और 120-B तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 5(2) के तहत दर्ज किया गया था। मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और कथित आपराधिक साजिश से संबंधित आरोप शामिल हैं।
इस मामले में नामजद तीन आरोपियों की पहचान अब्दुल राशिद गोजरी, मंजूर अहमद वानी और पीर अब्दुल राशिद के रूप में हुई है। अब्दुल राशिद गोजरी बीरवाह स्थित उप-मंडलीय कृषि कार्यालय में हेल्पर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि मंजूर अहमद वानी बडगाम के मुख्य कृषि अधिकारी कार्यालय में सेक्शन ऑफिसर हैं। तीसरे आरोपी पीर अब्दुल राशिद कृषि विभाग में उप-मंडलीय कृषि अधिकारी (SDAO) के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
क्राइम ब्रांच के अनुसार, इस मामले की शुरुआत 15 फरवरी 2022 को प्राप्त एक आधिकारिक पत्र से हुई थी। यह पत्र मध्य कश्मीर के उपनिदेशक कृषि की ओर से भेजा गया था, जिसमें कुछ अधिकारियों द्वारा सरकारी सेवा रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर अनुचित लाभ हासिल करने के मामले की जानकारी दी गई थी। शिकायत से जुड़े तथ्यों का सत्यापन किए जाने के बाद जांच एजेंसी ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की।
जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि आरोपी अब्दुल राशिद गोजरी ने जन्मतिथि का एक फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। आरोप है कि इस प्रमाणपत्र में उनकी जन्मतिथि 27 फरवरी 1975 के बजाय 27 फरवरी 1973 दर्शाई गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, जन्मतिथि में दो वर्ष का यह अंतर उनके सरकारी सेवा रिकॉर्ड में दर्ज किया गया, जिससे सेवा संबंधी लाभ हासिल करने का रास्ता तैयार हुआ। इसी आधार पर क्राइम ब्रांच के तत्कालीन थाने में एफआईआर दर्ज की गई, जिसे अब पुलिस थाना स्पेशल क्राइम विंग कश्मीर के नाम से जाना जाता है।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि अब्दुल राशिद गोजरी कृषि विभाग में दैनिक वेतनभोगी के रूप में प्रारंभिक नियुक्ति के समय केवल 17 वर्ष और दो महीने के थे। जांच एजेंसी के अनुसार, उनकी नियुक्ति और सेवा रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेजों की जांच के दौरान जन्मतिथि में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया। एजेंसी ने इस बात की भी पड़ताल की कि संबंधित दस्तावेजों को विभागीय रिकॉर्ड में शामिल करने की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई और इसमें किन अधिकारियों की भूमिका रही।
क्राइम ब्रांच के आरोपों के अनुसार, मामले के दूसरे आरोपी मंजूर अहमद वानी और तीसरे आरोपी पीर अब्दुल राशिद ने कथित रूप से गलत जन्मतिथि को सेवा रिकॉर्ड में दर्ज कराने में मदद की। जांच एजेंसी का कहना है कि दस्तावेजों के सत्यापन के लिए दिए गए निर्देशों की अनदेखी की गई, जिसके परिणामस्वरूप कथित रूप से गलत जन्मतिथि सरकारी रिकॉर्ड में शामिल हो गई। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से संबंधित कर्मचारी की सेवाओं को नियमित करने में सहायता मिली।
जांच एजेंसी ने बताया कि मामले की जांच के दौरान एफआईआर में दर्ज आरोपों के संबंध में तीनों आरोपियों के खिलाफ अपराधों के पर्याप्त आधार स्थापित हुए। जांच में सेवा रिकॉर्ड, जन्मतिथि से संबंधित दस्तावेजों और विभागीय प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की गई। क्राइम ब्रांच के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
चार्जशीट अदालत में पेश करने से पहले दो सेवारत सरकारी कर्मचारियों के संबंध में आवश्यक मंजूरी और अभियोजन स्वीकृति भी प्राप्त की गई। इसके बाद स्पेशल क्राइम विंग कश्मीर ने मामले की चार्जशीट श्रीनगर की विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में दाखिल कर दी। अब मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी। चार्जशीट दाखिल होना जांच एजेंसी की कार्रवाई है; आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
क्राइम ब्रांच कश्मीर ने आम जनता से धोखाधड़ी करने वालों के प्रति सतर्क रहने की अपील की है। एजेंसी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की धोखाधड़ी या अन्य संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना क्राइम ब्रांच कश्मीर को दी जानी चाहिए। सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता और दस्तावेजों का उचित सत्यापन प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। एजेंसी की इस कार्रवाई को सरकारी सेवा रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के तहत एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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