प्रेग्नेंसी में करवा चौथ का निर्जला व्रत पड़ सकता है भारी, डिहाइड्रेशन और लो ब्लड शुगर का खतरा; जानें डॉक्टर की सलाह!!

चंडीगढ़। करवा चौथ का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। इस दिन कई महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहना मां और गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। गर्भावस्था में शरीर को पर्याप्त पानी, ऊर्जा और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जो मां के स्वास्थ्य और बच्चे के उचित विकास के लिए जरूरी हैं। ऐसे में करवा चौथ पर व्रत रखने की योजना बना रही गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतें और चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।

कोकून हॉस्पिटल, चंडीगढ़ की सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, डॉ. श्रुति कैंथ के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। निर्जला व्रत के दौरान पानी नहीं पीने से शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। इसके कारण कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर आना और ब्लड प्रेशर कम होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। गर्भावस्था में शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों के कारण पर्याप्त तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण होता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को धार्मिक परंपराओं का पालन करते समय अपनी शारीरिक जरूरतों और स्वास्थ्य की स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डॉक्टर के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर को बच्चे के विकास के लिए अतिरिक्त ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। लंबे समय तक कुछ नहीं खाने से ब्लड शुगर का स्तर कम हो सकता है, जिससे कमजोरी, कंपकंपी, पसीना आना, घबराहट और चक्कर आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। यह जोखिम विशेष रूप से उन महिलाओं में अधिक चिंता का विषय है, जिन्हें पहले से डायबिटीज है या जो ब्लड शुगर नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन अथवा अन्य दवाएं लेती हैं। ऐसी स्थिति में बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक भोजन छोड़ना स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सलाह लेनी चाहिए।

गर्भावस्था में डिहाइड्रेशन एक ऐसी समस्या है, जिस पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होने से अत्यधिक प्यास, मुंह सूखना, पेशाब कम आना, गहरे रंग का पेशाब और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लंबे समय तक पानी नहीं पीने से कुछ महिलाओं की तबीयत अधिक बिगड़ सकती है, खासकर तब जब उन्हें पहले से उल्टी या जी मिचलाने की समस्या हो। गर्भावस्था के दौरान शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। यदि निर्जला व्रत के दौरान डिहाइड्रेशन के लक्षण महसूस हों, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पानी और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता लेना मां की सेहत की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

प्रेग्नेंसी के शुरुआती तीन महीनों में कई महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस, उल्टी, जी मिचलाने और भोजन की गंध से परेशानी होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में लंबे समय तक खाली पेट रहने से कुछ महिलाओं में मतली और कमजोरी बढ़ सकती है। यदि गर्भवती महिला को पहले से लगातार उल्टी हो रही है या वह पर्याप्त भोजन और तरल पदार्थ नहीं ले पा रही है, तो निर्जला व्रत रखने से डिहाइड्रेशन का जोखिम और बढ़ सकता है। वहीं, गर्भावस्था के बाद के महीनों में भी मां की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना महत्वपूर्ण रहता है। इसलिए गर्भावस्था की किसी भी अवस्था में व्रत रखने का निर्णय सामान्य नियमों के आधार पर नहीं, बल्कि महिला की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।

जिन गर्भवती महिलाओं को एनीमिया यानी खून की कमी, हाई ब्लड प्रेशर, लो ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसी महिलाओं में लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से मौजूदा समस्याओं को संभालना अधिक कठिन हो सकता है। इसी तरह, जिन महिलाओं को डॉक्टर ने नियमित अंतराल पर भोजन करने, पर्याप्त पानी पीने या दवाएं निर्धारित समय पर लेने की सलाह दी है, उन्हें व्रत के कारण इन निर्देशों में बदलाव नहीं करना चाहिए। गर्भावस्था में हर महिला की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी अन्य महिला के अनुभव के आधार पर अपने लिए व्रत को सुरक्षित मान लेना उचित नहीं है।

डॉ. श्रुति कैंथ के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान करवा चौथ का निर्जला व्रत रखने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है। डॉक्टर गर्भवती महिला की गर्भावस्था की अवस्था, मेडिकल हिस्ट्री, मौजूदा स्वास्थ्य समस्याओं और दवाओं को ध्यान में रखकर उचित मार्गदर्शन दे सकते हैं। यदि चिकित्सकीय स्थिति के कारण उपवास से बचने की सलाह दी जाती है, तो मां और बच्चे की सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है। धार्मिक आस्था और परंपराओं का सम्मान करते हुए भी ऐसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है, जिनमें लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने की जरूरत न हो। हालांकि, गर्भावस्था में किसी भी तरह का उपवास सुरक्षित है या नहीं, इसका निर्णय व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

यदि किसी गर्भवती महिला को व्रत के दौरान चक्कर आने, अत्यधिक कमजोरी, कंपकंपी, घबराहट या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो उसे इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में व्रत रोककर सुरक्षित तरीके से पानी और आवश्यक पोषण लेना चाहिए तथा जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। बेहोशी, भ्रम, लगातार उल्टी, बहुत कम पेशाब या गंभीर कमजोरी जैसे लक्षण होने पर तत्काल चिकित्सा मूल्यांकन जरूरी है। यदि पेट में तेज दर्द, योनि से रक्तस्राव या बच्चे की गतिविधियों में सामान्य से स्पष्ट कमी महसूस हो, तो बिना देरी किए चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए शरीर द्वारा दिए जाने वाले चेतावनी संकेतों को समझना बेहद जरूरी है।

करवा चौथ जैसे त्योहार परिवारों में प्रेम, विश्वास और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं। गर्भावस्था के दौरान इस पर्व को मनाते समय परिवार के सदस्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। पति और परिवार को गर्भवती महिला की स्वास्थ्य जरूरतों को समझना चाहिए तथा उस पर निर्जला व्रत रखने का दबाव नहीं डालना चाहिए। यदि महिला की स्वास्थ्य स्थिति उपवास की अनुमति नहीं देती, तो परिवार को उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए। त्योहार की खुशियां मनाने के लिए स्वास्थ्य को जोखिम में डालना जरूरी नहीं है। आपसी सहयोग, भावनात्मक समर्थन और चिकित्सकीय सलाह के साथ पर्व को सुरक्षित एवं सकारात्मक तरीके से मनाया जा सकता है।

डॉ. श्रुति कैंथ का संदेश स्पष्ट है कि गर्भावस्था के दौरान मां और गर्भ में पल रहे बच्चे का स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से डिहाइड्रेशन, ब्लड शुगर कम होने और कमजोरी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, हालांकि हर गर्भवती महिला पर इसका प्रभाव समान नहीं होता और किसी जटिलता का होना निश्चित नहीं है। इसलिए करवा चौथ पर निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना, शरीर में पानी की कमी के संकेतों को पहचानना और अस्वस्थ महसूस होने पर तुरंत उचित कदम उठाना जरूरी है। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी निभाना ही मां और बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे बेहतर तरीका है।

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