CBI Action Raises Questions Over Chandigarh Outsourcing

CBI Action Raises Questions Over Chandigarh Outsourcing

CBI कार्रवाई के बाद चंडीगढ़ में 30 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती व्यवस्था पर सवाल !!

चंडीगढ़, 17 अक्टूबर 2026। चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती व वेतन भुगतान में कथित करोड़ों रुपये की अनियमितताओं को लेकर सीबीआई की कार्रवाई के बाद मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। संयुक्त कर्मचारी मोर्चा, यूटी एवं एमसी चंडीगढ़ ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी केंद्रीकृत सरकारी एजेंसी गठित करने की मांग की है।

मोर्चा के अनुसार, चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम में करीब 30 हजार कर्मचारी आउटसोर्स व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि निजी ठेकेदारों के माध्यम से भर्ती होने के कारण कर्मचारियों को वेतन कटौती, भुगतान में देरी और ईपीएफ व ईएसआई से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

मोर्चा के कन्वीनर गोपाल दत्त जोशी, सुरमुख सिंह, सुखबीर सिंह, रंजीत हंस और विपिन शेर सिंह ने संयुक्त बयान में कहा कि मौजूदा भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बदलाव जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों की मध्यस्थता से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

संगठन ने मांग की कि निजी ठेकेदारों की मध्यस्थता समाप्त कर कर्मचारियों को सरकारी व्यवस्था के तहत डीसी रेट पर नियोजित किया जाए। इसके लिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम की तर्ज पर एक केंद्रीकृत सरकारी एजेंसी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जो भर्ती प्रक्रिया, वेतन भुगतान और कर्मचारियों से जुड़े अन्य मामलों की निगरानी कर सके।

मोर्चा का कहना है कि ऐसी एजेंसी बनने से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ सकती है और कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलने के साथ ईपीएफ व ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। संगठन ने प्रशासन से मांग की कि आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए जल्द ठोस कदम उठाए जाएं।

सीबीआई की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए मोर्चा ने मांग की कि जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। हालांकि, कथित अनियमितताओं और उनके लिए जिम्मेदार लोगों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होंगे।

मोर्चा ने प्रशासन से अपील की कि कर्मचारियों की भर्ती और वेतन भुगतान व्यवस्था की समीक्षा कर केंद्रीकृत एजेंसी गठित करने पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। संगठन के मुताबिक, इससे कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के साथ भर्ती और भुगतान संबंधी प्रक्रियाओं को अधिक जवाबदेह बनाया जा सकेगा।

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उसकी मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो संबंधित कर्मचारियों को एकजुट कर लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। मोर्चा ने कहा कि कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए उसका संघर्ष जारी रहेगा।

यह मांग संयुक्त कर्मचारी मोर्चा, यूटी एवं एमसी चंडीगढ़ की ओर से जारी संयुक्त बयान में रखी गई है। फिलहाल, केंद्रीकृत एजेंसी के गठन को लेकर प्रशासन के किसी निर्णय की जानकारी इस बयान में नहीं दी गई है।

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