चंडीगढ़, 3 सितंबर: सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई थीं। शहर के विभिन्न मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और श्रद्धालुओं में पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। मंदिर परिसरों में धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी रूपरेखा तैयार की गई थी।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर शहरभर में भक्तिमय माहौल बना हुआ था। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जगह-जगह भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों और भजनों की गूंज सुनाई दे रही थी। श्रद्धालु परिवार सहित मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना में शामिल हुए।
श्री सनातन धर्म मंदिर, सेक्टर-46 बी में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष आयोजन किया गया। मंदिर सभा की ओर से पर्व को लेकर कई धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिर परिसर को श्रद्धालुओं के स्वागत और विभिन्न आयोजनों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया था।
मंदिर सभा सेक्टर-46 के अध्यक्ष जतिंदर भाटिया ने बताया कि जन्माष्टमी समारोह की शुरुआत सुबह 7 बजे ध्वजारोहण के साथ हुई। इसके बाद सुबह 8 बजे गीता पाठ का आयोजन किया गया। सुबह 9 बजे हवन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर भगवान श्रीकृष्ण से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
दिन के आगे बढ़ने के साथ मंदिर में धार्मिक गतिविधियां लगातार जारी रहीं। महिलाओं की ओर से दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक विशेष संकीर्तन किया गया। संकीर्तन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के भजनों का गुणगान किया गया और पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
संकीर्तन में शामिल महिलाओं ने भक्ति भाव के साथ भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया। इस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही भी बनी रही। जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और धार्मिक आयोजनों में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
शाम के समय मंदिर में बच्चों की ओर से विशेष रासलीला का आयोजन किया गया। रात 7 बजे से 9 बजे तक आयोजित रासलीला में बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया। धार्मिक प्रसंगों पर आधारित इस प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।
रासलीला के माध्यम से बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी शिक्षाओं को सांस्कृतिक रूप में प्रस्तुत किया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने बच्चों की प्रस्तुतियों को सराहा। कार्यक्रम ने जन्माष्टमी समारोह में धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक रंग भी जोड़ दिया।
रात 9:30 बजे से मंदिर में प्रवचन एवं भजन संध्या का आयोजन किया गया, जो मध्यरात्रि 12 बजे तक चला। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की कथाओं और भजनों का आनंद लिया। कार्यक्रम में धार्मिक वातावरण लगातार बना रहा और श्रद्धालु मध्यरात्रि में होने वाले जन्मोत्सव के लिए मंदिर में मौजूद रहे।
आचार्य श्री गोपाल शुक्ल जी ने इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी शिक्षाओं से संबंधित कथा का व्याख्यान किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से धर्म, सत्य, प्रेम और कर्म के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के संदेशों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। कथा के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और उन्होंने धार्मिक प्रवचन को ध्यानपूर्वक सुना।
भजन संध्या में मधुर भजन प्रवाहक एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त श्री केके आनंद जी ने प्रस्तुति दी। उनके भजनों से मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण और अधिक गहरा गया। श्रद्धालुओं ने भजनों के साथ भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया और जन्मोत्सव की घड़ी का इंतजार किया।
मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का विशेष आयोजन किया गया। जैसे ही जन्मोत्सव का समय आया, मंदिर परिसर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान के जन्म की खुशी में उत्साह व्यक्त किया और धार्मिक वातावरण में जन्मोत्सव मनाया।
जन्मोत्सव के बाद भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया। इसके पश्चात विशेष आरती आयोजित हुई। श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर में मौजूद लोगों के लिए यह जन्माष्टमी समारोह का सबसे प्रमुख और भावनात्मक क्षण रहा।
रात 12:30 बजे श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। जन्माष्टमी के दौरान मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक कार्यक्रमों को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया गया।
जतिंदर भाटिया ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सनातन संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन लोगों को धर्म, सत्य, प्रेम और कर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा है। उनके उपदेश आज भी समाज के लिए मार्गदर्शन का कार्य करते हैं।
मंदिर सभा के महासचिव सुशील सोवत, सचिव अशोक भगत सहित आरके जोशी, जौली त्रिखा, बीके मिगलानी और कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया। मंदिर के पुजारी हरिकिशन जी, शैलेंद्र जी और राहुल जी ने भी विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक कार्यक्रमों में सहयोग दिया।
मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से परिवार सहित जन्माष्टमी समारोह में शामिल होने और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की थी। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में धार्मिक उत्साह बना रहा और मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति का माहौल देखने को मिला।
जन्माष्टमी के बाद शनिवार, 5 सितंबर को नंद उत्सव का आयोजन भी किया गया। मंदिर में रात 9:30 बजे से 11:30 बजे तक प्रवचन एवं भजन संध्या रखी गई। इसके बाद रात 12 बजे आरती आयोजित की गई और आरती के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया।
इस तरह सेक्टर-46 बी स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का आयोजन धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। सुबह ध्वजारोहण से शुरू हुआ कार्यक्रम मध्यरात्रि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, अभिषेक और आरती के साथ अपने चरम पर पहुंचा। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा।


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